गोरखपुर बनेगा एक्सपोर्ट हब


 


आने वाले वर्षों में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के उत्पादों के निर्यात को पंख लगने वाले हैं। इसके लिए सरकार जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट एक्सपोर्ट प्लान तैयार कर रही है। इस योजना के अमली जामा पहनते ही यूपी के सभी जिले एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसिल होंगे और देश भर में इसकी पहचान बनेगी। इस योजना से गोरखपुर समेत दोनों मंडलों के कई उत्पादों को पंख लगेंगे।


एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत बस्ती में काष्ठ कला, देवरिया में सजावट के सामान, गोरखपुर में टेराकोटा, कुशीनगर में केला फाइबर उत्पाद, महराजगंज में फर्नीचर, संतकबीरनगर में ब्रासवेयर व सिद्धार्थनगर में कालानमक खाद्य प्रसंस्करण को उत्पाद के रूप में चुना गया है। गोरखपुर में एयरपोर्ट की सुविधा है ही, कुशीनगर में भी जल्द शुरू होने वाली है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी गोरखपुर से जुड़ने जा रहा है। ऐसे में यहां एक जिला एक उत्पाद योजना से जुड़े योजनाओं के लिए भविष्य में काफी संभावनाएं दिख रही हैं।


जल्द होगी बैठक : इस संबंध में डायरेक्टर जनरल फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) के क्षेत्रीय अधिकारी अपने क्षेत्र में बैठकें आयोजित करेंगे। इसमें जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के उपायुक्त, बैंकर्स, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, क्वालिटी एंड टेक्निकल स्टैंडर्ड बॉडीज, केंद्र सरकार के सुक्ष्म-लघु एवं मध्यम उद्योग, भारी उद्योग और स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि शामिल होंगे।


सीएम की महत्वाकांक्षी योजना: डिस्टिक्ट एक्सपोर्ट प्लान मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। इन उत्पादों की कीमत कम करने व प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। मसलन ओडीओपी के कई उत्पाद खेतीबाड़ी से जुड़े हैं। इनके निर्यात को आसान करने के लिए कृषि निर्यात नीति पिछले साल ही आ चुकी है। बाकी उत्पादों के निर्यातकों को भी और सहूलियत मिले, इसके लिए सरकार महानिदेशक व्यापार विभाग और फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) की मदद से जल्द ही नई व्यापार नीति ला रही है।


एक्सपोर्ट प्लान का मकसद


एक्सपोर्ट प्लान का मकसद स्थानीय उद्योगों को उत्पादन से लेकर निर्यात की प्रक्रिया में मदद करना है। उद्यमियों और निर्यातकों के हित में केंद्र एवं राज्य की योजनाओं का प्रचार-प्रसार, केंद्र और राज्य के संबंधित विभागों एमएसएमई, रेवेन्यू एंड टेक्सटाइल और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय हिस्सेदारी, बैंकिंग एवं क्रेडिट के मामलों को जल्द और प्रभावी हल के लिए सक्षम प्राधिकारी तक पहुंचाना, जिला स्तर पर लॉजिस्टिक और बुनियादी संरचना में सुधार के लिए रणनीति तैयार करना, ग्राहकों और उत्पादकों में सीधा संवाद स्थापित करने के लिए समय-समय पर बायर्स-सेल मीट आयोजित करना शामिल है।